पूछते हैं नेता – तेरी जात है क्या सैनिक 

न पूछो मेरी जात ही मुझसे न पूछो मेरा मज़हब

सैनिक बना हूँ जब से बस देश ही जात है मेरी।

देश ही खु़दा है मेरा, देश ही रब भी मेरा, देश ही मेरा ईश्वर।

बना हूँ इसी मिट्टी से यही मिट्टी ढकेगी काया

अगर जान सको तो जानो लेकर खुशबू उस मिट्टी से

कौन है मेरा ईश्वर कौन वो मेरा खुदा है।

पूछो मेरी जात उसी से पूछो मेरा कौम उसीसे।

दुश्मन की गोली से बहता सीमा पर खून की धारा

अंजली में लेकर खोजो पंडित दिखता या काजी।

फिर मुझको भी कह देना मैं मुस्लिम हूँ या हिन्दू।

गोली पर लिखा नहीं है किसकी छाती को बेधे

गलती होने पर गोली नहीं जाती वापस तरकस में।

दर्द अधिक ही होता गोली से अपनों की बातों में

जब पूछते एक सैनिक से जात कौम या मजहब।

छलनी हो जाता सीना इन बातों को सुन सुनकर

रहती है छवि वतन की घायल न करो मजहब से।

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